काशीपुर। दुर्घटना या अन्य कारणों से शारीरिक अक्षमता का सामना कर रहे लोगों के लिए काशीपुर स्थित देवऋषि फिजियोथेरेपी क्लीनिक उम्मीद की किरण बनकर उभर रहा है। क्लीनिक के संचालक डॉ. ऋषिराज सिंह अपने लंबे अनुभव, मेहनत और सेवा भावना के साथ मरीजों को बेहतर फिजियोथेरेपी सेवाएं उपलब्ध कराने में जुटे हैं। इस कार्य में उनकी सहयोगी बीना माटा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

डॉ. ऋषिराज सिंह मूलरूप से लखनऊ के निवासी और उच्च शिक्षित(MPT.BPT)हैं, उन्होंने वर्ष 2009 में काशीपुर में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में सेवाएं देनी शुरू की थीं । एक मुलाकात में हमारे संवाददाता को उन्होंने बताया कि काशीपुर में उनकी सेवा-यात्रा वर्ष 2009 में रोटरी क्लब के माध्यम से शुरू हुई। तब से वे लगातार क्षेत्र के लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।वर्तमान में वे सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक श्री आनंदपुर चैरिटेबल डिस्पेंसरी में मरीजों को सेवाएं देते हैं। इसके बाद शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक मुरादाबाद रोड स्थित अपने खुद के देवऋषि फिजियोथेरेपी क्लीनिक में मरीजों को परामर्श और उपचार संबंधी सेवाएं प्रदान करते हैं।
बीना माटा निभा रही हैं अहम भूमिका
डॉ. ऋषिराज सिंह ने बताया कि उनकी सहयोगी बीना माटा सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक एचआरपीसी रोटरी क्लब, काशीपुर में फिजियोथेरेपी सेवाएं देती हैं। वे स्वयं भी समय-समय पर वहां पहुंचकर मरीजों की स्थिति का जायजा लेते हैं और सेवाओं का निरीक्षण करते हैं। डॉ. सिंह ने सहयोग के लिए बीना माटा की खुले कंठ से सराहना करते की है।
एक सवाल के जवाब में डॉक्टर ऋषिराज सिंह ने बताया कि अपने सेवाकाल में यूं तो उन्होंने कई कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए फिजियोथेरेपी के जरिए मरीज को ठीक किया है, उदाहरण स्वरूप उन्होंने बताया कि चार वर्ष पूर्व ठाकुरद्वारा क्षेत्र का एक युवा डंपर से एक्सीडेंट के बाद अपना एक पैर काफी हद तक गवां चुका था, ऑपरेशन के बाद जब वह उनके पास आया तो चलने फिरने की स्थिति में नहीं था। उन्होंने फिजियोथेरेपी के माध्यम से उसका इलाज किया और आज वह विदेश में नौकरी करता है चलने फिरने के साथ भाग दौड़ भी कर सकता है। डॉ. सिंह ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में हद से ज्यादा मोबाइल का यूज करने के कारण युवा पीढ़ी और महिलाएं सर्वाइकल पेन से पीड़ित हो रहे हैं, हम उन्हें बेहतर इलाज के साथ अपनी सेहत से खिलवाड़ न करने की सलाह भी देते रहते हैं।
