हरिद्वार में कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक गिरि ने निर्माण कार्यों की धीमी गति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूरे नहीं हुए तो कुंभ की व्यवस्थाएं प्रभावित होंगी और जल्दबाजी में काम पूरा करने पर गुणवत्ता से समझौता करना पड़ सकता है।
डॉ. अशोक गिरि ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1974 के पूर्ण कुंभ का समापन देखा था और यह उनके जीवन का दसवां कुंभ होगा। वर्तमान में शहरभर में सीवर और पेयजल लाइनों का कार्य चल रहा है, लेकिन आम जनता को यह स्पष्ट नहीं है कि इन कार्यों की जिम्मेदारी किस विभाग या संस्था की है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की प्रभावी निगरानी भी दिखाई नहीं दे रही है।
उन्होंने मेला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मेला अधिकारी की नियुक्ति मई 2025 में हुई थी। उनके सहयोग के लिए अपर और उप मेला अधिकारी भी नियुक्त किए गए थे। अब एक और अपर मेला अधिकारी की नियुक्ति से प्रशासनिक कार्यक्षमता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने अनुभवी अधिकारियों को मेला प्रशासन में उचित जिम्मेदारी देने की आवश्यकता जताई।
डॉ. गिरि ने कहा कि उत्तराखंड शासन और प्रशासन प्रयागराज की तर्ज पर कुंभ आयोजन का दावा कर रहे हैं, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए साधु-संतों, व्यापारियों, साहित्यकारों, समाजसेवियों, मीडिया और आम जनता के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इसके लिए मेला प्रशासन को व्यवहारकुशलता और कार्यक्षमता का परिचय देना होगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि कुंभ के दौरान अधिकतम स्थायी निर्माण कार्य कराए जाएं। कुंभ के प्रतीक चिह्न में उत्तराखंड, हरिद्वार और कुंभ की स्पष्ट झलक होनी चाहिए। स्मारिका के संपादन की जिम्मेदारी युवा या प्रौढ़ साहित्यकार को दी जानी चाहिए। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों को भीड़ प्रबंधन का प्रशिक्षण देने, बिजली-पानी की सुचारू व्यवस्था करने तथा यातायात और पार्किंग की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का सम्मान बनाए रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।