पिथौरागढ़। सीमांत जिला पिथौरागढ़ में आदि कैलाश और ऊं पर्वत यात्रा की शुरुआत हो गई है। सीमांत धारचूला से एसडीएम आशीष जोशी ने हरी झंडी दिखाकर करीब 200 यात्रियों को रवाना किया। यात्रा के लिए अब तक 500 यात्रियों के आवेदन आ चुके हैं, जिनमें से 350 इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं। यात्रा के शुभारंभ के दौरान शिवभक्तों ने हर-हर महादेव से गूज उठा। प्रशासन की ओर से यात्रा को लेकर सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
धारचूला से रवाना हुए यात्री करीब 140 किलोमीटर की यात्रा कर गुंजी और कुटी होते हुए ज्योलिंगकांग पहुंचेंगे। यहां पार्वती सरोवर से आदि कैलाश के दर्शन करेंगे। इसके बाद गुंजी लौटकर नाभिढांग जाएंगे, जहां से ऊं पर्वत के दर्शन होंगे. इस दौरान पुलिस उपाधीक्षक धारचूला कुंवर सिंह रावत और एसओ हरेंद्र सिंह नेगी ने यात्रियों और चालकों से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की। पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षित यात्रा के लिए सतर्कता जरूरी है। आदि कैलाश को अब कैलाश मानसरोवर के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। जहां चारधाम यात्रा में 5 से 11 दिन लगते हैं, वहीं आदि कैलाश यात्रा 5 से 7 दिन में पूरी हो जाती है। कम भीड़ और प्राकृतिक अनुभव के कारण युवा इसे तेजी से पसंद कर रहे हैं। आदि कैलाश यात्रा 3,000 से 5,500 मीटर की ऊंचाई तक जाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा रहता है। प्रशासन ने मेडिकल सर्टिफिकेट और इनर लाइन परमिट अनिवार्य किया है। यह क्षेत्र भारत-चीन सीमा के पास स्थित है। सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से सेना की गतिविधियां भी मजबूत हुई हैं, जिससे यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से भी अहम हो गया है। आदि कैलाश यात्रा के पैकेज 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक हैं। बजट मिड-रेंज और प्रीमियम पैकेज उपलब्ध हैं, जिनमें यात्रा, ठहरने और परमिट की सुविधा शामिल है। यात्रा को लेकर धारचूला में लोगों में उत्साह देखने को मिला है।