देहरादून/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के चलते विमानन क्षेत्र में पैदा हुए अल्पकालिक वित्तीय दबाव से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने मई 2026 में ईसीएलजीएस 5.0 शुरू की है। सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि योजना के तहत अनुसूचित यात्री विमानन क्षेत्र के पात्र उद्यमों को उनकी अधिकतम बकाया ऋण सीमा के 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण की सुविधा दी जा रही है। इस ऋण पर एनसीजीटीसी के माध्यम से 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज उपलब्ध है।
मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक अनुसूचित यात्री विमानन क्षेत्र से ईसीएलजीएस 5.0 के तहत कुल आठ आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 2,529.67 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। चार आवेदन 920.22 करोड़ रुपये की राशि के लिए मंजूर किए गए हैं, जबकि तीन मामलों में 912.40 करोड़ रुपये की गारंटी जारी की जा चुकी है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि योजना से विमानन कंपनियों को संकट के समय आवश्यक तरलता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे हवाई सेवाओं की निरंतरता के साथ रोजगार और यात्रियों के हितों की भी रक्षा होगी।
उन्होंने बताया कि 100 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण सहायता का इस्तेमाल ईंधन, हवाई अड्डा शुल्क, विमान पट्टा भुगतान और अन्य जरूरी परिचालन खर्चों में किया जाना है। इसके उपयोग के सत्यापन के लिए ऑडिटर प्रमाण-पत्र की व्यवस्था भी की गई है।
रावत ने कहा कि मजबूत विमानन क्षेत्र विकसित भारत की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है। संकट की स्थिति में केंद्र सरकार की यह पहल उद्योग, रोजगार और आम नागरिकों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।