हरिद्वार। श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि भागवत कथा भगवान का वांगमय स्वरूप है जिसका श्रवण करने मात्र से भक्त पर भगवान की कृपा बरसने लगती है। वे आज राजा गार्डन स्थित श्री हनुमत गौशाला हनुमान मंदिर सत्संग हॉल में गीता विज्ञान आश्रम के तत्वावधान में व्यास पूजा महोत्सव के उपलक्ष में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में भागवत ज्ञान की अमृत वर्षा कर रहे थे।
श्रीमद्भागवत को वेद और वेदांत का सार बताते हुए महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि कलयुग में भगवान भागवत में ही विद्यमान रहते हैं और वैदिक विधान से जब व्यास पीठ पर श्रीमद् भागवत की स्थापना की जाती है तो भगवान स्वयं व्यास पीठ से अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।भागवत कथा के आयोजक हों या स्रोता जो भी व्यास पीठ के सानिध्य में आता है वह सीधे भगवान का कृपापात्र बन जाता है। भगवान के अवतारों की कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि सृष्टि के रचनाकाल से त्रेता और द्वापर तक भगवान ने भक्तों की आवश्यकता अनुसार अवतार लेकर सृष्टि का कल्याण किया और कलयुग में श्रीमद्भागवत में ही समाहित हो गए इसीलिए कलयुग में भागवत कथा का श्रवण मानव जीवन की सार्थकता के लिए अनिवार्य हो गया है। सृष्टि के सृजन की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि पहले मंत्र सृष्टि से मानव की उत्पत्ति होती थी बाद में मनु और शतरूपा से मैथुन सृष्टि का प्रादुर्भाव हुआ। कथा विश्राम के समय सभी भक्तों ने व्यास पीठ की आरती उतार कर विश्व कल्याण की कामना की।